उदित उदयगिरि मंच पर, रघुबर बालपतंग संदर्भ, प्रसंग सहित व्याख्या । Udit Udaygiri Manch Par, Raghubar Bal Patang । Up Board 10th Hindi Kavyakhand Chapter 2 । Tulsidas
प्रस्तुत आर्टिकल में आपको तुलसीदास जी द्वारा लिखित Udit Udaygiri Manch Par, Raghubar Bal Patang का Explanation बताया गया है।
अगर आप यूपी बोर्ड में पढ़ते हो तो आपके हिन्दी 'काव्य' में दूसरे पाठ में ये होगा। तो आपके लिए ये आर्टिकल काफी ज्ञानवर्धक है।
आपको ढूढने में आसानी हो इसलिए हर एक का अलग - अलग व्याख्या किया गया है तो नीचे दिए गए लिंक का पालन करके आप अपने सिलेबस के कोने - कोने की जानकारी पा सकते हो।
पद्य
उदित उदयगिरि मंच पर, रघुबर बालपतंग ।
बिकसे संत सरोज सब, हरषे लोचन भृंग ।।
संदर्भ - प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्य - पुस्तक हिन्दी के काव्य - खंड के धनुष - भंग शीर्षक से अवतरित है। जिसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी हैं। उक्त पंक्तियां इनके द्वारा लिखी श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड से संकलित है।
प्रसंग - प्रस्तुत पद्यांश में धनुष - भंग के लिए बने हुए मंच पर श्रीरामचन्द्र जी के चढ़ने का वर्णन किया है।
व्याख्या - प्रस्तुत पद्यांश में तुलसीदास जी कहते हैं कि उदयांचल पर्वत के समान बने हुए विशाल मंच पर श्रीरामचन्द्र जी के रूप में बाल सूर्य के उदित होते ही सभी संत रूपी कमल खिल उठे हैं और नेत्ररूपी भंवरे हर्षित हो उठे हैं। भाव यह है कि मंच पर रामचंद्र जी के चढ़ते ही महफ़िल में बैठे सभी सज्जन व्यक्ति अत्यधिक प्रसन्न हो जाते हैं।
काव्यगत सौंदर्य -
प्रस्तुत पद्य में रामचंद्र जी के सौंदर्य और मंच की विशालता का वर्णन किया गया है।
भाषा - अवधी
शैली - प्रबंध और चित्रात्मक
रस - अद्भुत
छंद - दोहा
अलंकार - अनुप्रास, रूपक, उपमा अलंकार का मंजुल प्रयोग।
गुण - माधुर्य
कठिन शब्दों के अर्थ -
उदित - निकलना
उदयगिरि - उदयांचल पर्वत
रघुवर - श्रीराम
बालपतंग - प्रातः कालीन सूर्य, बाल सूर्य
सरोज - कमल
लोचन - नेत्र (आंख)
भृंग - भंवरे
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