सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जाने यमदुतिया मेला लगेगा या नहीं - करनैलगंज के मनिहारी के सरयू तट पर भाई दूज के दिन सैकड़ों वर्षों से लग रहा है मेला । Yamdutiya Mela Manihari

गोण्डा (करनैलगंज) - गोण्डा जिले के करनैलगंज क्षेत्र के मनिहारी ग्राम में सरयू तट पर हर वर्ष भाई दूज के दिन यमदुतिया मेले का आयोजन होता है। जिसमें करीब 10 हजार से ज्यादा लोग आते हैं। लेकिन इस बार संशय में है कि लगेगा या नहीं। 

मनिहारी, गोंडा समाचार, स्थानीय समाचार
यमदुतिया मेला 2018 की फोटो (Pic Credit - Rajan Mishra)

नमस्कार, आदाब मैं हूं अवनीश कुमार मिश्रा

भाई दूज के दिन गोण्डा के करनैलगंज के मनिहारी ग्राम में सैकड़ों वर्षों से सरयू नदी के तट पर यमदुतिया घाट पर यमदुतिया मेले का आयोजन होता है। जो कि इस बार ना लगने की कगार पर है। जहां तक ख़बरें मिल रही है उसके मुताबिक ना लगने की बात पक्की है।
मेले के समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक प्रशासन ने रोक लगा दी है। समिति के सदस्य मुन्ना लाल मिश्रा (पूर्व प्रधान), छोटकऊ बाबा के मुताबिक पुलिस ने उन्हें यह नोटिफिकेशन दिया है कि मेला नहीं लगना है। और जो भी दुकानदार आए उन्हें वापस भेज दो। 

मनिहारी, कर्नलगंज न्यूज़, गोंडा न्यूज़
शाम तक यमदुतिया मेले के ग्राउंड का सुनसान रहा 

दुकानें आने चालू हो गई थीं। झूले भी लगने लगे थे मगर किसी ने पुलिस को सूचना दे दी और फिर प्रशासन हरकत में आ गई। और समिति के सदस्यों, दुकानदारों को सख़्त वार्निंग देते हुए फटकार लगाई। हालांकि झूला अब भी लगा हुआ है। और दुकानें ना आए इसके लिए प्रशासन मौजूद है।
अब मेला लगने के चांस काफी कम हैं। हो सकता है कि सुबह 4 बजे से आने वाली दुकानें लग जाएं जब उन्हें कोई रोकने वाला ना हो। 
फ़िलहाल यही खबर है कि मेला लगने के चांस बहुत ही कम है। सैकड़ों सालों से आ रही यमदुतिया मेले को लगने का सिलसिला इस बार कोरोना ने तोड़ दिया है।

राजन मिश्रा से देर रात मिली खबर के अनुसार पुलिस आ जा रही है और दुकानदार भी जुटे हुए हैं, लौटाए जाने पर दुकानदार आसपास ही ठहर जा रहे हैं। शायद पुलिस की गैरमौजूदगी में वे दुकानों को सजाएं। 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

अगर आप कुछ कहना चाहते हैं , इस लेख के बारे में तो प्लीज कमेंट करें |

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ की संदर्भ, प्रसंग सहित व्याख्या । Meri Bhaw Badha Harau Doha Bihari Lal

"मेरी भव-बाधा हरौ" की संदर्भ सहित व्याख्या इस आर्टिकल में की गई है। जो कि रससिद्ध कवि बिहारी की रचना है। और खास बात यह है कि यह पद्यांश यूपी बोर्ड के 10वीं के हिन्दी के काव्य में "भक्ति" शीर्षक से है। तो अगर आप 10वीं में हो तो आपके लिए ये काम की आर्टिकल है। आपके परीक्षा में आ सकता है।  ये दोहा शीर्षक का पहला "दोहा" है। आपको ढूढ़ने में दिक्कत ना हो इसलिए हर एक "पद" के लिए अलग - आर्टिकल लिखा गया है। (यह आर्टिकल आप Gupshup News वेबसाइट पर पढ़ रहे हो जिसे लिखा अवनीश कुमार मिश्रा ने वे ही इस वेबसाइट के ऑनर हैं) दोहा - मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ । जा तन की झांईं परै, स्यामु हरित-दुति होइ॥ संदर्भ - प्रस्तुत दोहा  हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी के "काव्य खंड" में "भक्ति " शीर्षक से उद्धृत है , जोकि रीतिकाल के रससिद्ध कवि बिहारी द्वारा रचित ‘बिहारी सतसई’ नामक ग्रंथ से लिया गया है। प्रसंग - प्रस्तुत पंक्ति में कवि ने राधा जी की वंदना की है। प्रस्तुत दोहे के कईं भाव हैं तो सभी को लिखा जा रहा है, जिससे समझने में आसानी हो। व्याख्या -   1...

Gori Tori Chunari Ba Lal - Lal Re Song Lyrics | गोरी तोरी चुनरी बा लाल - लाल रे लिरिक्स | Ritesh Pandey New Song Lyrics | अंतरा सिंह 'प्रियंका'

गोरी तोरी चुनरी बा लाल - लाल रे गाना भोजपुरी का सुपरहिट गाना है | इसे पहले विशाल दूबे ने गाया था | वे ही इस गाने के राइटर हैं | अब इस गाने को रितेश पाण्डे व अंतरा सिंह 'प्रियंका' ने गाया है | म्यूजिक दिया है आशीष वर्मा ने | इस गाने को वेब म्यूजिक पर रिलीज किया गया है | इसे गाने के मुखड़े का अर्थ - गोरी तोरी चुनरी बा लाल - लाल रे गाना में नायिका कहती है कि जब घर से बाहर निकलती हूँ तो सब हमसे आँखे लड़ाना चाहते हैं | मतलब प्यार करना चाहते हैं | और सभी हमारे गोरे - गोरे गाल को छूना चाहते हैं | इस पर नायक कहता है कि जब तुम सड़क पर लाल रंग की चुनरी पहनकर निकलती हो तब कमाल की चाल चलती हो | -:- गोरी तोरी चुनरी बा लाल - लाल रे लिरिक्स -:- जब निकले नी घर से बहरिया , चाहे सभे लड़ावल नजरिया सभे छुअल चाहे हमरो गोर गाल रे , गोर गाल रे अरे गोर गाल रे (बात बुझाता) गोरी तोरी चुनरी बा लाल लाल रे (ओहसे का) गोरी तोरी चुनरी बा लाल लाल रे (तब) रोड पर चलेलु कमाल चाल रे (अरे जिय) गोरी तोरी चुनरी बा लाल लाल रे रोड पर चलेलु कमाल चाल रे (साँचो) गोरी तोरी चुनरी बा लाल ल...

बलिहारी गुर आपणैं का संदर्भ , प्रसंग सहित व्याख्या । Sakhi । Kabeer Ke Dohe Class 11 Up Board Solutions

प्रस्तुत पद्यांश "बलिहारी गुर आपणैं ‘" का संदर्भ , प्रसंग , व्याख्या , काव्य सौंदर्य तथा शब्दार्थ इस आर्टिकल में लिखा गया है। जो की कबीरदास जी की रचना है , ये छात्रों के लिए काफी मददगार होने वाला है। खास बात यह है कि अगर आप यूपी बोर्ड के 11वीं में हो तो हिंदी के "काव्य" पाठ 1 में "साखी" शीर्षक से है। आपको दूढ़ने में दिक्कत ना हो इसलिए हर एक "दोहे" का आर्टिकल अलग - लिखा गया है। (यह आर्टिकल आप Gupshup News वेबसाइट पर पढ़ रहे हो जिसे लिखा है, अवनीश कुमार मिश्रा ने, ये ही इस वेबसाइट के ऑनर हैं)                               दोहा बलिहारी गुर आपणैं, द्यौहाड़ी कै बार। जिनि मानिष तैं देवता, करत न लागी बार॥ सन्दर्भ - प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी के "काव्य खंड" में ‘साखी’ शीर्षक से उद्धृत है, जो साखी ग्रंथ से लिया गया है। जिसके रचयिता कबीरदास जी हैं। प्रसंग - कबीरदास ने प्रस्तुत दोहे में गुरु के प्रति अपनी भावना व्यक्त किया है और महिमा का वर्णन करते हुए उनपर न्यौछावर हो जाने की बात की है।  व्याख्या - प्...