सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Khesari Lal Yadav New Song 2021 - Tor Dulha Jalandhar Ke Bandar Lagat Ba Full Video Song । Khesari, Antra Singh 'Priyanka'

भोजीवुड (मुंबई) - भोजपुरी के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav Ka Gana) के एक और गाने वीडियो मार्केट में आ चुका है। जो कि तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो मे खेसारी की मनपसंद मॉडल अनीशा पांडेय नज़र आ रही हैं।

नमस्कार, आदाब मैं हूं अवनीश कुमार मिश्रा

भोजपुरी के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Ke Gana) का हर दिन कोई ना कोई सॉन्ग मार्केट में जरूर आ जाता है। किसी - किसी दिन कईं गाने भी आ जाते हैं। फिलहाल एक गाना उनका मार्केट में आ चुका है, जिसका नाम है तोर दूल्हा जालंधर के बंदर लागत बा (Tor Dulha Jalandhar Ke Bandar Lagat Ba Bhojpuri Video Song Khesari Lal Yadav).
इस गाने को गाया है खेसारी के साथ अंतरा सिंह प्रियंका ने, लिखा है, अखिलेश कश्यप ने और Music दिया है, श्याम सुन्दर ने।
अगर बात करें ऑडियो की तो काफी शानदार है, खेसारी और Antra Singh 'Priyanka' दोनों शानदार गा रहे हैं, हर बार की तरह, और वीडियो भी काफ़ी अच्छा है, इसमें Khesari Lal Yadav के साथ Anisha Pandey एक बार फिर से नज़र आ रही हैं।

Tor Dulha Jalandhar Ke Bandar Lagat Ba ke बारे में संक्षिप्त विवरण -

Song - Tor Dulha Jalandhar Ke Bandar Lagat Ba
Singer - Khesari Lal Yadav, Antra Singh 'Priyanka'
Lyrics - Akhilesh Kashyap
Music - Shyam Sundar
Label - Aadishakti Films



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ की संदर्भ, प्रसंग सहित व्याख्या । Meri Bhaw Badha Harau Doha Bihari Lal

"मेरी भव-बाधा हरौ" की संदर्भ सहित व्याख्या इस आर्टिकल में की गई है। जो कि रससिद्ध कवि बिहारी की रचना है। और खास बात यह है कि यह पद्यांश यूपी बोर्ड के 10वीं के हिन्दी के काव्य में "भक्ति" शीर्षक से है। तो अगर आप 10वीं में हो तो आपके लिए ये काम की आर्टिकल है। आपके परीक्षा में आ सकता है।  ये दोहा शीर्षक का पहला "दोहा" है। आपको ढूढ़ने में दिक्कत ना हो इसलिए हर एक "पद" के लिए अलग - आर्टिकल लिखा गया है। (यह आर्टिकल आप Gupshup News वेबसाइट पर पढ़ रहे हो जिसे लिखा अवनीश कुमार मिश्रा ने वे ही इस वेबसाइट के ऑनर हैं) दोहा - मेरी भव-बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ । जा तन की झांईं परै, स्यामु हरित-दुति होइ॥ संदर्भ - प्रस्तुत दोहा  हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी के "काव्य खंड" में "भक्ति " शीर्षक से उद्धृत है , जोकि रीतिकाल के रससिद्ध कवि बिहारी द्वारा रचित ‘बिहारी सतसई’ नामक ग्रंथ से लिया गया है। प्रसंग - प्रस्तुत पंक्ति में कवि ने राधा जी की वंदना की है। प्रस्तुत दोहे के कईं भाव हैं तो सभी को लिखा जा रहा है, जिससे समझने में आसानी हो। व्याख्या -   1...

Gori Tori Chunari Ba Lal - Lal Re Song Lyrics | गोरी तोरी चुनरी बा लाल - लाल रे लिरिक्स | Ritesh Pandey New Song Lyrics | अंतरा सिंह 'प्रियंका'

गोरी तोरी चुनरी बा लाल - लाल रे गाना भोजपुरी का सुपरहिट गाना है | इसे पहले विशाल दूबे ने गाया था | वे ही इस गाने के राइटर हैं | अब इस गाने को रितेश पाण्डे व अंतरा सिंह 'प्रियंका' ने गाया है | म्यूजिक दिया है आशीष वर्मा ने | इस गाने को वेब म्यूजिक पर रिलीज किया गया है | इसे गाने के मुखड़े का अर्थ - गोरी तोरी चुनरी बा लाल - लाल रे गाना में नायिका कहती है कि जब घर से बाहर निकलती हूँ तो सब हमसे आँखे लड़ाना चाहते हैं | मतलब प्यार करना चाहते हैं | और सभी हमारे गोरे - गोरे गाल को छूना चाहते हैं | इस पर नायक कहता है कि जब तुम सड़क पर लाल रंग की चुनरी पहनकर निकलती हो तब कमाल की चाल चलती हो | -:- गोरी तोरी चुनरी बा लाल - लाल रे लिरिक्स -:- जब निकले नी घर से बहरिया , चाहे सभे लड़ावल नजरिया सभे छुअल चाहे हमरो गोर गाल रे , गोर गाल रे अरे गोर गाल रे (बात बुझाता) गोरी तोरी चुनरी बा लाल लाल रे (ओहसे का) गोरी तोरी चुनरी बा लाल लाल रे (तब) रोड पर चलेलु कमाल चाल रे (अरे जिय) गोरी तोरी चुनरी बा लाल लाल रे रोड पर चलेलु कमाल चाल रे (साँचो) गोरी तोरी चुनरी बा लाल ल...

बलिहारी गुर आपणैं का संदर्भ , प्रसंग सहित व्याख्या । Sakhi । Kabeer Ke Dohe Class 11 Up Board Solutions

प्रस्तुत पद्यांश "बलिहारी गुर आपणैं ‘" का संदर्भ , प्रसंग , व्याख्या , काव्य सौंदर्य तथा शब्दार्थ इस आर्टिकल में लिखा गया है। जो की कबीरदास जी की रचना है , ये छात्रों के लिए काफी मददगार होने वाला है। खास बात यह है कि अगर आप यूपी बोर्ड के 11वीं में हो तो हिंदी के "काव्य" पाठ 1 में "साखी" शीर्षक से है। आपको दूढ़ने में दिक्कत ना हो इसलिए हर एक "दोहे" का आर्टिकल अलग - लिखा गया है। (यह आर्टिकल आप Gupshup News वेबसाइट पर पढ़ रहे हो जिसे लिखा है, अवनीश कुमार मिश्रा ने, ये ही इस वेबसाइट के ऑनर हैं)                               दोहा बलिहारी गुर आपणैं, द्यौहाड़ी कै बार। जिनि मानिष तैं देवता, करत न लागी बार॥ सन्दर्भ - प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी के "काव्य खंड" में ‘साखी’ शीर्षक से उद्धृत है, जो साखी ग्रंथ से लिया गया है। जिसके रचयिता कबीरदास जी हैं। प्रसंग - कबीरदास ने प्रस्तुत दोहे में गुरु के प्रति अपनी भावना व्यक्त किया है और महिमा का वर्णन करते हुए उनपर न्यौछावर हो जाने की बात की है।  व्याख्या - प्...